अगर आप जिद्दी है तो आप भी बन सकते हैं प्रधानमंत्री। जी हां, जिद्द एक ऐसी चीज है जो आपको सफलता के सीढ़ियों पे तेजी से चढ़ा सकती है। Translate 👇 to read in your language जिद्द क्या होता है जिद्द एक ऐसी चीज हैं, जो किसी इंसान को निरंतर प्रयास करने के लिए प्रेरित करता है। यानी जो व्यक्ति जिद्दी होते है वो किसी कार्य को तब तक नहीं छोड़ते जब तक वह उस कार्य में सफलता हासिल नहीं कर लेते है। इसलिए जिद्दी लोग ही अक्सर सफल होते है। उदाहरण:– राष्ट्रीय स्तर की वॉलीबॉल खिलाड़ी रहीं अरुणिमा सिन्हा, सन 2011 में ट्रेन से जा रहीं थी, और उनको कुछ गुंडों ने चलती ट्रेन से फेंक दिया था. पूरी रात रेलवे ट्रैक पर उन्हें असहनीय पीड़ा के साथ गुजारना पड़ा। अरुणिमा जी को इस घटना में अपना एक पैर गंवाना पड़ा और उनके दूसरे पैर में रॉड लगाई गई. इस घटना के 2 साल बाद ही वह हिमालय की चोटी पर चढ़ने वाली पहली अपंग महिला बन गई। बहुत से लोगो ने उन्हें यह करने से रोका पर वह अपने जिद्द पे अड़ी रही और सफल बन पाई। जिद्दी होने के क्या क्या फायदे है 1. जिद्दी लोग दृढ़–संकल्प वाले होते है जिद्दी ...
महाभारत काल कहते हैं महाभारत काल में कुंती को सूर्य उपासना से कर्ण पुत्र के रूप में प्राप्त हुए थे. कर्ण खुद सूर्य के बहुत बड़े भक्त और उपासक थे. वे घंटों जल में खड़े रह सूर्य की पूजा करते और अर्घ देते थे . सूर्य को अर्घ देने की शुरुआत उसी समय हुई. महाभारत काल में ही जब पांडवों का राज-पाट सभी कुछ छिन गया तब द्रौपदी ने सूर्य की उपासना कर उन्हें इस संकट से उबारने की प्रार्थना की थी . Translate 👇 to read in your language रामायण काल रामायण काल में भी प्रभु राम और सीता माता ने लंका विजय के बाद कार्तिक शुक्ल पक्ष के पष्ठी को उपवास कर सूर्य की आराधना की और पुनः सप्तमी तिथि को सूर्योदय के वक्त सूर्य उपासना कर पूजा संपन्न की थी. कहते हैं कि षष्ठी तिथि को सूर्य उपासना होने के कारण इसे षष्ठी पर्व कहा गया, जिसे बाद में छठ , षष्ठी के अपभ्रंश के रूप में कहा जाने लगा. वहीं, यह भी मान्यता है कि छठी देवी, भगवान सूर्य की बहन हैं . हमारी आस्था का सूचक है पर्व पौराणिक होने के साथ यह पर्व प्रकृति के प्रति हमारी गहन आस्था का भी सूचक है. कृषि कार्य के प्रति आदर को भी समर्पित है...